कमीशनखोरी से उखड़ी मासूमों की सांसे: 69 लाख बकाया था, 1.86 करोड़ अकाउंट में थे, फिर भी रोका पेमेंट

कमीशनखोरी से उखड़ी मासूमों की सांसे: 69 लाख बकाया था, 1.86 करोड़ अकाउंट में थे, फिर भी रोका पेमेंट

गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से मासूमों की मौत के मामले में कमीशनखोरी का खेल सामने आने लगा है। मेडिकल कॉलेज को ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली पुष्पा सेल्स को 68.65 लाख रुपये का भुगतान करना था। खाते में 1.86 करोड़ रुपये भी थे, इसके बावजूद पेमेंट नहीं किया गया। यह जांच का विषय है कि भुगतान किसके कहने पर रोका गया। सूत्रों की मानें तो मेडिकल कॉलेज के अफसरों ने सप्लायर को पेमेंट इसलिए नहीं किया क्योंकि उन्हें भुगतान में कमीशन नहीं मिल रही थी। यह भी कहा जा रहा है कि सप्लायर को पैसा न देने के लिए लखनऊ से निर्देश आए थे।

सवाल उठता है कि आखिर लखनऊ में किसके कहने पर सप्लायर का पैसा रोका गया।

सीएम के दौरे के चलते जारी फंड, उन्हीं की वजह से रुका

सीएम योगी को 9 अगस्त को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज के दौरे पर जाना था, इसलिए शासन ने फंड तत्काल जारी कर दिया। निलंबित प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा ने शनिवार को कहा था कि फंड मिल गया था, लेकिन सीएम के दौरे के कारण भुगतान में देरी हुई। गौरतलब है कि मामला बिगड़ा तो 11 अगस्त को आनन-फानन में कंपनी को भुगतान कर दिया गया।

शासन ने दो करोड़ भेजा

चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने बताया कि प्रिंसिपल ने 4 अगस्त को पत्र भेजकर पैसे की मांग की। अगले ही दिन बीआरडी मेडिकल कॉलेज के अकाउंट में 2 करोड़ रुपये ट्रांसफर कर दिए गए। सूत्रों के अनुसार सरकार से पैसा मिलने के बाद खाते में 3.86 करोड़ रुपये हो गए थे। यानी 1.86 करोड़ पहले से ही थे।
ऐसी सजा देंगे जो कि मिसाल बनेगी
कमीशनखोरी से उखड़ी मासूमों की सांसे: 69 लाख बकाया था, 1.86 करोड़ अकाउंट में थे, फिर भी रोका पेमेंट

मासूमों की मौत के 48 घंटे बाद गोरखपुर मेडिकल कॉलेज पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि इस मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई होगी। सजा ऐसी मिलेगी जो मिसाल बनेगी। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय कमेटी पूरे मामले की जांच कर रही है। केंद्र सरकार से भी 3 डॉक्टरों की टीम आई है। जांच रिपोर्ट आने दीजिए, जो भी जिम्मेदार होगा, बख्शा नहीं जाएगा।

सीएम ने इंसेफेलाइटिस वार्ड का करीब डेढ़ घंटे तक निरीक्षण किया। भर्ती बच्चों व तीमारदारों से बात की। फिर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के साथ मीडिया से मुखातिब हुए और प्रदेश सरकार पर संवेदनहीनता के आरोपों को खारिज किया। इस बीच, अंबेडकरनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पीके सिंह को गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

संवेदनहीनता के सवाल पर हुए भावुक

प्रदेश सरकार की संवेदनहीनता के सवाल का जवाब देते हुए सीएम योगी भावुक हो गए। बोले- मासूमों की मौत पर मुझसे ज्यादा पीड़ा किसको होगी। सड़क से लेकर संसद तक मैंने इंसेफेलाइटिस के उन्मूलन को लेकर लड़ाई लड़ी है।

प्राइवेट प्रैक्टिस वाले डॉक्टरों पर होगी एफआईआर

कुछ सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस के सवाल पर सीएम ने कहा कि ऐसे डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होगी। मीडिया से मुखातिब होने से पहले सीएम ने बंद कमरे में इंसेफेलाइटिस वार्ड के प्रभारी डॉ. कफील अहमद समेत कुछ अन्य की कड़ी क्लास ली।

4 thoughts on “कमीशनखोरी से उखड़ी मासूमों की सांसे: 69 लाख बकाया था, 1.86 करोड़ अकाउंट में थे, फिर भी रोका पेमेंट

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