नए प्रोडक्ट के लिए जूझ रहा है अरविंद केजरीवाल का पॉलिटिकल स्टार्टअप

नए प्रोडक्ट के लिए जूझ रहा है अरविंद केजरीवाल का पॉलिटिकल स्टार्टअप

नई दिल्‍ली: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके कैबिनेट सहयोगी छह दिन से राजनिवास पर धरना दे रहे हैं. उनके इस धरने की वैधानिकता पर अब दिल्ली हाई कोर्ट ने भी सवाल उठा दिए हैं. अदालत ने पूछा है कि अगर यह हड़ताल है तो किसी के घर के भीतर कैसे हो सकती है. इस हड़ताल के चलते अरविंद केजरीवाल प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में नीति आयोग में हुई मुख्यमंत्रियों की बैठक में भी नहीं जा सके. हड़ताल के चलते दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन का स्वास्थ्य पहले ही गड़बड़ा चुका है.

 

केजरीवाल का यक्ष प्रश्‍न

यह सवाल अब पुराना पड़ गया है कि अरविंद केजरीवाल यह क्यों कर रहे हैं और इसका हासिल क्या है? केजरीवाल बनाम केंद्र बनाम उपराज्यपाल बनाम अफसरशाही का चक्रव्यूह अब इतना पुराना पड़ गया है कि लोगों को इसकी आदत सी पड़ गई है. और इसी तरह की आदत लोगों को केजरीवाल के धरने और हड़तालों की भी पड़ गई है. इन हड़तालों से अब उस तरह का असर पैदा नहीं होता, जैसा असर 2011 से 2014 के बीच पड़ा करता था. और यही केजरीवाल का नया यक्ष प्रश्न है.

 

केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी के रूप में जो अपना राजनैतिक स्टार्टअप शुरू किया था और उसने कांग्रेस एवं बीजेपी जैसी जमी-जमाई सियासी कंपनियों को चुनौती दी थी. उसकी यूएसपी धरना और हड़ताल ही थे. यही उनका अमोघ अस्त्र था. इसके साथ ही केजरीवाल का दूसरा प्रमुख अस्त्र था- सारी राजनैतिक पार्टियों को बेईमान बताना और अपने अलावा हर नेता को भ्रष्ट करार देना. उनकी यह बातें भी अन्ना आंदोलन और उसके बाद के दौर में खूब सराही गईं.